रोना चाह कर भी आँसुओं को न गिरने देते हैं, तभी होता है उनका एक सुखी संसार।। रोना चाह कर भी आँसुओं को न गिरने देते हैं, तभी होता है उनका एक सुखी संसार...
इसकी नींव हमें घर से रखनी होगी, अपने कुटुम्ब की सोच परखनी होगी। इसकी नींव हमें घर से रखनी होगी, अपने कुटुम्ब की सोच परखनी होगी।
परिवार और समाज एक ही , सिक्के के दो पहलू समझिए । परिवार और समाज एक ही , सिक्के के दो पहलू समझिए ।
सब रिश्ते बेईमान हो गए, मां-बाप मेहमान हो गए। सब रिश्ते बेईमान हो गए, मां-बाप मेहमान हो गए।
पैसा खूब कमा रहे पर अपने संस्कारों को भूलते जा रहे पैसा खूब कमा रहे पर अपने संस्कारों को भूलते जा रहे
पुरुष पुरुषार्थ गृहस्थ जीवन मर्म, मर्यादा का मतलब, महत्व कहलाता।। पुरुष पुरुषार्थ गृहस्थ जीवन मर्म, मर्यादा का मतलब, महत्व कहलाता।।